प्यासी चिडियां

उन शब्दों का क्या
जो कभी पेड़ या तने हुआ करते थे

वक्त ऐसा है कि
शब्द पत्थराने लगे है
शीतल छाँव के आभाव में
धरती सूखती जा रही है

आसमान बेबस है
निहारता है अब
धुप और छांव

क्षितिज के छोर पर
बैठी प्यासी चिडियां
सूखती नदी को पुकार रही है
वह कौन सा शब्द होगा
जिससे गंगा वापस आयेगी  !!

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