जीवन चक्र पर बैठे हमसब

रात अंधेरी 
जगमग तारा 
सुबह को भुला 
चाँद दुलारा 

भोर हुई तब 
पनघट लौटे 
किसने फोड़ी 
गगरी तेरी 

सूरज निकला 
दिन चले तब  
दुपहरी प्यासी 
छांव बेचारी 

शाम आई है 
नाँव किनारे 
लहरों की ठोकर 
धरती खाती 

मेरा खोना 
तेरा पाना 
पलभर का है 
खेल खिलौना 

जीवन चक्र पर 
बैठी चिड़ियाँ 
सुबह- सवेरे 
गाना गाती 

कितना अच्छा 
वो पल होता 
बहारों की गीत 
मिल सब गाते 
पतझड़ में ना
आँख भींगाते !

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