सूखती रही कई कई नदियां

जीवन पी जाती है
कई कई नदियां
और मछलियां तड़पती हुई
दम तोड देती हैं

लहरों ने बचाई
कई कई बार
कई कई जिन्दगियां
बावजूद इसके
सिकुड़ती गई गंगा

उछल कर
गिरती रही मछलियां
और सूख गई सब नदियां !!

8 comments:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

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  2. प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त (समृद्ध भारत की आवाज़)
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  3. जीवन पी जाती है
    कई कई नदियां
    और मछलियां तड़पती हुई
    दम तोड देती हैं

    बहुत सुंदर, क्या कहने

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  5. बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ यथार्थ का सच दिखाती रचना हार्दिक बधाई.

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति. हार्दिक बधाई.

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