चलते रहे बहुत मगर
मंजिल का साथ ना मिला
सुखनसाज़ बहुत बजते रहे
पर करारे-सुकून ना मिला
तख्तों ताज़ पर बैठे रहे वो
पर वादों पर फूलों सा चमन ना मिला
मिलती जो उन्हे इक खुशी चाँद सा
चाँदनी को , पर बादलो का साथ ना मिला
पहाड हर तरफ रहे पिघल भी जाते
मगर उगते सूरज का, इन्हें साथ ना मिला
जलती रही चिरागें-मोहब्बत बहुत
गुजरते वक्त में उम्र का साथ ना मिला
क्या खो के वे ताकीद कर रहे है
सूना है कि उन्हें अपनों का साथ ना मिला
भींग भी जाते और बरस भी, वो मगर
बादलों को हवा का साथ ना मिला !!
मंजिल का साथ ना मिला
सुखनसाज़ बहुत बजते रहे
पर करारे-सुकून ना मिला
तख्तों ताज़ पर बैठे रहे वो
पर वादों पर फूलों सा चमन ना मिला
मिलती जो उन्हे इक खुशी चाँद सा
चाँदनी को , पर बादलो का साथ ना मिला
पहाड हर तरफ रहे पिघल भी जाते
मगर उगते सूरज का, इन्हें साथ ना मिला
जलती रही चिरागें-मोहब्बत बहुत
गुजरते वक्त में उम्र का साथ ना मिला
क्या खो के वे ताकीद कर रहे है
सूना है कि उन्हें अपनों का साथ ना मिला
भींग भी जाते और बरस भी, वो मगर
बादलों को हवा का साथ ना मिला !!