आडी-तिरछी लकीरें

किताबों में
बेहिसाब आडी-तिरछी लकीरें है

जवाब
अक्षरों के हिस्से में नहीं आती है

सुना है
कलम को उकेरता कोई कलाकार है

साफ़ सफ़ेद
किताबों को पलटता कोई तो है

किताबें जगह भी छेकतीं है
और स्याही पन्नों पर फैलती जाती है

सवाल शब्दों के
एक ठीगने से व्यक्ति के चेहरे पर उगता है

बिना हाथ के
सब के सब आकाश की तरफ देखते है

उम्मीद
डबडबायी आँखों से छलकती है !

2 comments:

  1. प्रभावी ...
    उम्मीद फॉर भी रहती तो है ...

    ReplyDelete
  2. मुझे आपका blog बहुत अच्छा लगा। मैं एक Social Worker हूं और Jkhealthworld.com के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य के बारे में जानकारियां देता हूं। मुझे लगता है कि आपको इस website को देखना चाहिए। यदि आपको यह website पसंद आये तो अपने blog पर इसे Link करें। क्योंकि यह जनकल्याण के लिए हैं।
    Health World in Hindi

    ReplyDelete