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जरूर एक कविता हो

जलती हुई होनी चाहिये
एक कविता
भूख की आग की तरह
जिसमे जले एक एक अक्षर
विषमता के
खाक हो विषम धारणाये
जरूर एक कविता हो 

अन्न से पैदा हो उर्जा
और गरीबी लाठी टेकना छोडे
विषम लपट में 
मरने और मिटने वालो पर  
जरुर एक कविता हो  

बंजर जमीन पर जख्म रिसते रहे  
धोखा फलते और फुलते रहे 
कांटो के अततायी चूभन पर
जरुर एक कविता हो

बढ रहे नाखूनो के
काटने के सही तरीको पर और
उनके उंगलियो से बचा लिये गये
मासूमो के खुशी पर
जरुर एक कविता हो

बंदरो की टोली में 
नन्हें मासूम बिलखते रहे 
रिश्तो की गर्मी जो खोते रहे 
उनके अरमानो को सवारने पर
जरुर एक कविता हो

पत्थर तोडती माँओ के
पूरे दिन के कमाई में भूख एक बिवाई रही
गरीबी के जिस्म पर 
तार तार आंचल में
उनके चाँद-तारो के पेट ना भर पाने पर 
जरुर एक कविता हो  !!