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सीलन है गुजरें वक्त के दीवार पर

कई दिनों से
खाली पडी है दीवार
जो कभी अपनों की
तस्वीरों से हरी भरी रहती थी

जानें कौन से वक्त में
बना डाली थी
हवाई किला उसनें
दीवार पर टंगी तस्वीरों ने 
सांस लेना छोड दिया था 

सख्त दीवारों में
सीलन पडी थी गुजरें वक्त का
जिन्हें छूते ही बेज़ान हो
गिरने लगती थी पपडियाँ

दीवार सूनी थी
खराश गहरी

लौटता वक्त बडी सलिकें से
कुरेद गया था उसे !!

यंत्रो के षडयंत्र में

सिसक रही है कोठियाँ
ईंट पत्थरों के जुबान  से 
खालिश रेत सी है भाषा
दीवारों पर
स्पष्टरुप से  चेतावनी लिख दी गयी  है

ग्लोबल वार्मिंग पर
रईसी माथे का टीका है
जो नित नए नुस्खे से
बढ़ा रही है ताप
यंत्रो के षडयंत्र में 

पौलिथींन एक फैशन
तो  दूसरी  तरफ 
पलायनवादी स्वाभाव  के कारण 
सब भाग रहे हैं जमीन से 
और चिपक रहे हैं आसमान से
पर कही कोई पंख नहीं है

सुविधाओं के ऊँचाई से
गिरने के बाद कही कोई जमीन नही मिलेगी
चारो तरफ खाई पसरी होगी

सबके लिए करींने से परोसा जा रहा है खाना
और हम सब सिसकती घरों को भूलते जा रहे हैं
और भूखी नंगी दीवारों को 
जो रोती है बीते पहर 
कान और आँख ऊँचाई पर
काम करना जो बंद कर  देते  है

मानवीय जुबान गुंगी हो चुकी है
यंत्रो के षडयंत्र से
पर आज भी अनिष्ट के अशंका में 
कुत्ते भौंकते है गलियों में 
बीते पहर जब सब सो रहे होते है !