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कैद है धड़कन

लोगों का कहना था कि
आज चाँद पर उथल-पुथल है
इसतरह मेरी जमींन की चाँदनी धुंधलाने लगी 
और धडकनें भी
तुम्हारे मुठ्ठियों में बंद पडी रही

रात स्याह कुछ ज्यादा थी
वह खडी रही मेरी जमीन पर
भोर के इंतजार में
पर सूरज थोडा कम था
सुबह आंख मुदे पडा रहा
तुम्हारे किनारे से लग

ना तुमने मुठ्ठियाँ खोली 
ना भोर ने आंखे  
न रात को नींद आयी
और धडकनें भी बंद रही
तुम्हारी मुठ्ठियों में  कही !!