भारत मेरा देश
मेरी बेटियों सा दिखता है मुझे
उनके नाजुक हाथो में
खींची लकीरो जैसा ही तो हैं
उसका आने वाला सबेरा
आंखो में रौशन खुशी जैसा ही
इसकी प्रकृति सम्पदा
उनकी हथेलियों सी नरम
इसके पावन धरती
अपार सुकून जैसे
क्षितिज पर विस्तार इसका
खिलखिलाती है तो
मुझे तिरंगे की याद दिलाती है
पर जब मै ख्यालों में
इन्हे बडा होते देखती हूँ तो
डर से भर उठती हूँ
इनकी सुरक्षा को लेकर
तब भी मेरा देश भारत
मुझे याद आता है !!!
मेरी बेटियों सा दिखता है मुझे
उनके नाजुक हाथो में
खींची लकीरो जैसा ही तो हैं
उसका आने वाला सबेरा
आंखो में रौशन खुशी जैसा ही
इसकी प्रकृति सम्पदा
उनकी हथेलियों सी नरम
इसके पावन धरती
अपार सुकून जैसे
क्षितिज पर विस्तार इसका
खिलखिलाती है तो
मुझे तिरंगे की याद दिलाती है
पर जब मै ख्यालों में
इन्हे बडा होते देखती हूँ तो
डर से भर उठती हूँ
इनकी सुरक्षा को लेकर
तब भी मेरा देश भारत
मुझे याद आता है !!!