बिखरना
नसीब फूलों का
माली नही वे कि सँवार देंगें
हौसलों को उड़ान देंगें
मंझधार में
छोड़ रहे कस्तियों को
बुझाते रहें रौशनी
टटोलते हुये अंधेरों को
बाबूल से
बबुल हुये वे कब
कंटीली ढाँचों के बीच
बसा फूल का शहर
बनी दुनिया तब
खुशबू बहुत थी !
नसीब फूलों का
माली नही वे कि सँवार देंगें
हौसलों को उड़ान देंगें
मंझधार में
छोड़ रहे कस्तियों को
बुझाते रहें रौशनी
टटोलते हुये अंधेरों को
बाबूल से
बबुल हुये वे कब
कंटीली ढाँचों के बीच
बसा फूल का शहर
बनी दुनिया तब
खुशबू बहुत थी !