बहुत सुंदर है किताब फूलो की
बदल दी है हिसाब वसूलो की
मुमकिन हो हर सवाल मासूमों की
बात गुलाब की हो ना कि कांटो की
रौशन हो शहर आओ बात करे फरीस्तो की
आ जाओ कि आसान हो दौर मुश्किलों की
छु लो कि मुकम्मल हो आसान हो सफर रातों का
गुफ्तगू में रही वो कह दो कोई नज्म होंठों की
अनकही अनछुई और अनदेखी रही सब की
अब न रहो चुप कि कह दो हर बात रकीबों की !!
बदल दी है हिसाब वसूलो की
मुमकिन हो हर सवाल मासूमों की
बात गुलाब की हो ना कि कांटो की
रौशन हो शहर आओ बात करे फरीस्तो की
आ जाओ कि आसान हो दौर मुश्किलों की
छु लो कि मुकम्मल हो आसान हो सफर रातों का
गुफ्तगू में रही वो कह दो कोई नज्म होंठों की
अनकही अनछुई और अनदेखी रही सब की
अब न रहो चुप कि कह दो हर बात रकीबों की !!