मछलियां अब बारिश में
भींगनें को मजबूर है
क्योंकि समंदर कल शाम से
औंधे मूंह पड़ा है
साहिल की उदासी में
चाँद झलकता है
लहरों की जल समाधि में
सूखी पडी है नमी जमीन की
शोर है किनारों पर
दिल सूना धडकनो से
छुपा ली है लम्स समंदर ने
लहरों के
अपने दामन में
धरती के सीने पर
समंदर नही उफनता अब
क्योकि चाँद पर पानी मिला है !!!
भींगनें को मजबूर है
क्योंकि समंदर कल शाम से
औंधे मूंह पड़ा है
साहिल की उदासी में
चाँद झलकता है
लहरों की जल समाधि में
सूखी पडी है नमी जमीन की
शोर है किनारों पर
दिल सूना धडकनो से
छुपा ली है लम्स समंदर ने
लहरों के
अपने दामन में
धरती के सीने पर
समंदर नही उफनता अब
क्योकि चाँद पर पानी मिला है !!!