घटते बढते चाँद सा
सलोना चेहरा और
आंखे जलते दो तारे
पूरे आसमान पर
पंक्षी के उडते रहना और
माप लेना उसका
सूरज चाँद
उंचाई मापने वाले
गहरे भी उतरे
और
पाताल के किसी कोने में
पडे तडपते पिंजडे तक पहुंचे
यह जरुरी नही
अंधेरो के पहरे में
कैद एक बुत
जिस्म और जान के
पत्थर होने तक चुप
बादलों को क्या पता
उनके बरस जाने के बाद
पानी कहाँ बहकर जाता
किससे मिलता है और
किससे नही मिल पाता
उफनता ऐसा जैसे
डुबोता कई महासागर
किनारो से लगकर
धरती पर फैलता
लहलहाती हरी घासों में
इक चाँद जो
सौंधी मिट्टी की गहराई को
मापने का ख्वाब लिये बैठा रहा !!
सलोना चेहरा और
आंखे जलते दो तारे
पूरे आसमान पर
पंक्षी के उडते रहना और
माप लेना उसका
सूरज चाँद
उंचाई मापने वाले
गहरे भी उतरे
और
पाताल के किसी कोने में
पडे तडपते पिंजडे तक पहुंचे
यह जरुरी नही
अंधेरो के पहरे में
कैद एक बुत
जिस्म और जान के
पत्थर होने तक चुप
बादलों को क्या पता
उनके बरस जाने के बाद
पानी कहाँ बहकर जाता
किससे मिलता है और
किससे नही मिल पाता
उफनता ऐसा जैसे
डुबोता कई महासागर
किनारो से लगकर
धरती पर फैलता
लहलहाती हरी घासों में
इक चाँद जो
सौंधी मिट्टी की गहराई को
मापने का ख्वाब लिये बैठा रहा !!