यादो के निर्मल झरनें में बहती रही
जाने किस किस लम्हो में
वह नदी रही पर सूखी रही
बहती रही उफनती रही
कलकल हुई छल छल बनी
वह नदी रही पर सूखी रही
सुनहरी हुई सौंधी बही
सूरज डुबा मद्धम शाम हुई
वह नदी रही पर सूखी रही
गुजरती रही हरीभरी हुई
शांत लहरे तन्हा रातें रेंत हुई
वह नदी रही पर सूखी रही
गाती चली सुमधुर बही शीतल हुई
लहर लहर मचल मचल
वह नदी रही पर सूखी रही !!
जाने किस किस लम्हो में
वह नदी रही पर सूखी रही
बहती रही उफनती रही
कलकल हुई छल छल बनी
वह नदी रही पर सूखी रही
सुनहरी हुई सौंधी बही
सूरज डुबा मद्धम शाम हुई
वह नदी रही पर सूखी रही
गुजरती रही हरीभरी हुई
शांत लहरे तन्हा रातें रेंत हुई
वह नदी रही पर सूखी रही
गाती चली सुमधुर बही शीतल हुई
लहर लहर मचल मचल
वह नदी रही पर सूखी रही !!