मुश्किलों से खेलता
रोता बच्चों की तरह
दिखता
उसके आंखो में खुदा
मानो वह बचपन का
छूटा कोई ख्याल
मुश्किल यह है कि
मुश्किल में सख्त नही वह
पर उम्र और समय से परे
बहुत आसान
क्योंकि बुध्दिजीवी है
वह जी लेता हैं सबकुछ
पता है उसे
चाहता क्या है
चाहत उसकी
बंद मुठ्ठियों में खुला आसमान
जिसपर खींच रखी है उसने
चंद लकीरें ख्वाहिशों की
इंद्रधनुषी
सूरज मद्धम नही होता उन रंगों की
मुश्किल बस इतना सा कि
ख्वाब उसका अपना सा है
जो सोने नही देता !!
रोता बच्चों की तरह
दिखता
उसके आंखो में खुदा
मानो वह बचपन का
छूटा कोई ख्याल
मुश्किल यह है कि
मुश्किल में सख्त नही वह
पर उम्र और समय से परे
बहुत आसान
क्योंकि बुध्दिजीवी है
वह जी लेता हैं सबकुछ
पता है उसे
चाहता क्या है
चाहत उसकी
बंद मुठ्ठियों में खुला आसमान
जिसपर खींच रखी है उसने
चंद लकीरें ख्वाहिशों की
इंद्रधनुषी
सूरज मद्धम नही होता उन रंगों की
मुश्किल बस इतना सा कि
ख्वाब उसका अपना सा है
जो सोने नही देता !!