मिट्टी में कैद खुशबू

1.
शब्दो के हंस
झील में कबसे से है
कुछ ठीक ठीक याद नही !!

2.

गमों को कुछ
यूँ दफनाया
कि
किताब में खिलकर
फूल हुआ !

3.

किनारो की बेबसी ऐसी
कि
तुफानो को समेटे हुये है !

4.

रात की स्याही
बढती जाये
सुबह का बादल
जमते जाये
सपनो के तारे बिखरे पडे हैं
पर
आस का चाँद
डुब ना पाये !

5.

तपिश बढती रही
जिंदगी की नमी को
बादल ने चुरा लिया था !

6.

एक दीवार थी कही
गिरा दिया उसने
जिंदगी से भरी
रौशन शब्दों से
रु-ब-रु होती रही !

7.

चिंटियाँ जमीन को
खोंखला करती रही
सुबह सुबकती रही
समंदर उफनता रहा
खोखली जमीन पर
भुकम्प के झटके लगते रहे
दीवारें दरकने लगी है अब !

12 comments:

  1. तपिश बढती रही
    जिंदगी की नमी को
    बादल ने चुरा लिया था

    बहुत सुन्दर ...बधाई

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  2. बहुत खूब .... हर क्षणिका गहन अर्थ लिए हुये

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  3. सुन्दर क्षणिकाएं!

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  4. जिंदगी की नमी को
    बादल ने चुरा लिया था

    जिंदगी से रूबरू सुन्दर क्षणिकाएं

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  5. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 05 -07-2012 को यहाँ भी है

    .... आज की नयी पुरानी हलचल में .... अब राज़ छिपा कब तक रखे .

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  6. वाह....
    बहुत सुन्दर और अर्थपूर्ण क्षणिकाएं...

    अनु

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  7. एक दीवार थी कही
    गिरा दिया उसने
    जिंदगी से भरी
    रौशन शब्दों से
    रु-ब-रु होती रही !,aur sabhi bahut badhiya kshnikaye

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  8. वाह ...बेहतरीन

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  9. गहरे और सुन्दर भाव प्रस्तुत करती प्रभावी क्षणिकाएं...

    कुँवर जी,

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  10. गहन अर्थ संजोये सभी क्षणिकाएं बहुत सुन्दर...

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  11. बहुत बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  12. गमों को कुछ
    यूँ दफनाया
    कि
    किताब में खिलकर
    फूल हुआ !

    :) :)

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