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हम आसमान पर नही तो धरती पर....?

जमीन से निकलनेवाले
पेड-पौधो,कीडे-मकौडो की
कही कोई बात नही होती

कहाँ से आती है हरियाली और
कहाँ कहाँ है सुंदरतम चीजे
इसकी जानकारी कही कोई नही होती  

रोज धरती अपने जगह से
थोडा थोडा खिसक रही है
कही कोई चर्चा नही 

आसमान भी हररोज
थोडा कम नीला हो जाता है
इतनी बडी घटना पर भी 
रात की गहराई नही मापी जाती

रिश्तो में खुन कम
पानी ज्यादा भरने लगा है
और इसकद्र रोज थोडा
यह भी मरने लगा है

सभी भाग रहे वक्त की तरह
बिना सोचे 
परिवर्तन हमें किसी विनाश की संकेत दे रहे
पर
अनुमान लगाने से भी परहेज क्यो है
हम आसमान पर नही तो
धरती पर क्यो है ?

तलाश रास्तों की अभी बाकी हैं

वह उस जंगल में है अभी तक
जहाँ अवतरण होता है हर किसी का
सांसों के गिनती के साथ
लोग बने रास्तो पर निकल जाते है

खोज रही है सांसों का विकास
वो रास्ता
जो बना बनाया ना हो
क्योंकि नयी और पुरानी जमीनों के बीच
कुछ लोग भटक चुके हैं

वह बनाना चाहती है
पूर्वजों के जमीन पर
एक नया रास्ता
जो थोप कर नहीं बनाई गई हो
जिसपर चलना बनावा और छलावा ना हो

जिस रास्तें का चेहरा मुस्कुरायें
जिसपर आदमियत चलती हो
नाक पर जीने वाली दुनिया
सिर्फ भेंद पैदा करना जानती हैं
जहां दिल रोता है अरमान बिलखते हैं

मेरे और तुम्हारे बीच की जमीन
जिसका रंग भी एक जैसा हैं ना
उन्हें तलाश है  आज भी
उन रास्तो की !!!