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जंगल को शायद कभी बचाया जा सकेगा

जडें जल रही है उन जंगलो की
जहाँ हिंसक जानवर नही रहते 
जीवन वैसे ही उगता है वहाँ जैसा बोया गया है
बडी निर्ममता से काटे जा रहे है जंगलो को
और जलने तक छोडा भी

वक्त गाडी की पहियों पर सवार चौतरफा 
थकान से रगों में लहू ठंडी
बढते रफ्तार में ठहराव को विस्तार नही मिला 
और भागते हुये जीवन में
सपना आकाश से लटकता हुआ एक फल और 
पकने का इंतजार सबको रहा है अबतक

किसी गाँव के बगीचे से आती खुशबू और
चिमनी के धूँये में मजदूरो की जलती आंत से
आती बू से आइने धूँधलाने लगे है
वक्त के साथ मिट्टी भी जमीन छोडने  लगी है 
और ठिठूरती सर्दी में गरीबी का पलता सपना कि
सुदूर गाँव से उठने वाला आग
थोडा गर्मी पैदा करेगी
तब कुछ दिन ठीक ठीक बितेंगा 
और गाँवों में हिरण और मोर भी आयेंगे
खुब खुब ईद और दिवाली होगा

पर वो आग जो बुझता ही नही
ग्लेशियरो के पिघलने जाने से
जलन में पैदा राख से आंधी फैलने का दबाव
मौसमों पर बढता जा रहा है 
कुर्सियाँ अपनी जगह पर खुब सुरक्षित है
जमीनी हकीकत से दूर
लहलहाती घासों पर बैठी हुई
और उनकी नींद गहरी   

चलते हुये लोगो में
चेहरे पर विवशता और आंखों में
गहराई लिये हुये भाव ऐसे बैठे है कि
तंत्रो की तंत्रिकाओ में
तंतुओ से बेबसी दौड रही है
और निराशा गतिशील तंतुओ पर सवार हो
सम्प्रेषित कर रही है खौफ और डर 
तलाश भी रही है उम्मीद
पर जिसके जल जाने का अंदेशा निरंतर बना हुआ है
तमाम अश्वासनों के बावजूद 

जंगल को शायद
कभी बचाया जा सकेगा !!

तलाश रास्तों की अभी बाकी हैं

वह उस जंगल में है अभी तक
जहाँ अवतरण होता है हर किसी का
सांसों के गिनती के साथ
लोग बने रास्तो पर निकल जाते है

खोज रही है सांसों का विकास
वो रास्ता
जो बना बनाया ना हो
क्योंकि नयी और पुरानी जमीनों के बीच
कुछ लोग भटक चुके हैं

वह बनाना चाहती है
पूर्वजों के जमीन पर
एक नया रास्ता
जो थोप कर नहीं बनाई गई हो
जिसपर चलना बनावा और छलावा ना हो

जिस रास्तें का चेहरा मुस्कुरायें
जिसपर आदमियत चलती हो
नाक पर जीने वाली दुनिया
सिर्फ भेंद पैदा करना जानती हैं
जहां दिल रोता है अरमान बिलखते हैं

मेरे और तुम्हारे बीच की जमीन
जिसका रंग भी एक जैसा हैं ना
उन्हें तलाश है  आज भी
उन रास्तो की !!!