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बदलते तहजीब की नयी अंदाज

हिमालय से हो या
शिव जी की जट्टा से
गंगा की तरह
एक पवित्र भेंट है
कविता

ख्वाहिशों के बीच
एहसास की भटकन में
कोई नई धून है 
कविता

कांटो के बीच खिले हुये
फूल से
महकती कोई चमन  है
कविता 

कीचड के कोख में
सुबह-सवेरे  खिलता
एक कमल है
कविता

जानवरो के बीच
कस्तुरी के लिये भटकता
कोई नन्हा मृग है
कविता

बदलते तहजीब की
नई अंदाज़ है 
कविता !!

स्पर्श की ख्वाहिश को मुकम्मल हो जाने दे

शब्द-शब्द उलझ जाने दे
कविता-कहानी से बहल जाने दे

रौशन रहेगा अक्षरों में लौ
एक गीत को गज़ल हो जाने दे

शाखों पर रुत आयेंगी और जायेंगी
मेघों को दरख्तो पर बरस जाने दे

राग और विराग का नाद बिखरा है यहाँ
सूरो को तालो के साथ सज जाने दे

सांस उल्झी हुई है धडकनों में रात-दिन
स्पर्श की ख्वाहिश को मुकम्मल हो जाने दे !!