वे मगरूर हुये जाते है
कि
चाँद उनके मुठ्ठी में है
उन्हें नहीं पता कि
झील में कैद चाँद
चांदनी को तरसता है
चाहत की प्यास में
झील सूखता जाता है
उम्र सागर की
चाँद तक रही
पर
धरती पर चाँद
कब आता जाता है
उससे ना मिलना
एक बेबसी है
उनको अब ये बात
नागवार सी गुजरी है
उसकी एक तलाश में
भटकते रहे
दर-ब-दर
तलाश फिर भी तलाश रही
यकीन
कुछ यूं ना था कि
वह मिल जायेगा ऐसे
जिसकी प्यास में
पूरी जिन्दगी गुज़री !!
कि
चाँद उनके मुठ्ठी में है
उन्हें नहीं पता कि
झील में कैद चाँद
चांदनी को तरसता है
चाहत की प्यास में
झील सूखता जाता है
उम्र सागर की
चाँद तक रही
पर
धरती पर चाँद
कब आता जाता है
उससे ना मिलना
एक बेबसी है
उनको अब ये बात
नागवार सी गुजरी है
उसकी एक तलाश में
भटकते रहे
दर-ब-दर
तलाश फिर भी तलाश रही
यकीन
कुछ यूं ना था कि
वह मिल जायेगा ऐसे
जिसकी प्यास में
पूरी जिन्दगी गुज़री !!