हम बादल थे
बरस गये
पर
जमीन सूखी रह गई
बरस गये
पर
जमीन सूखी रह गई
तेरे समान के तह में
दुनिया जहान सब था
शरीर कुछ भी ना था
हमारे लिये
इक रुह की प्यास में
हम जुदा रह गये
हमारे लिये
इक रुह की प्यास में
हम जुदा रह गये
ओंस थे घास पर
और नमी आंखों की
शब्द शब्द पिघले
पर
पंक्तियों की कतार में
कविता प्यासी रह गई!
और नमी आंखों की
शब्द शब्द पिघले
पर
पंक्तियों की कतार में
कविता प्यासी रह गई!