तलाश रास्तों की अभी बाकी हैं

वह उस जंगल में है अभी तक
जहाँ अवतरण होता है हर किसी का
सांसों के गिनती के साथ
लोग बने रास्तो पर निकल जाते है

खोज रही है सांसों का विकास
वो रास्ता
जो बना बनाया ना हो
क्योंकि नयी और पुरानी जमीनों के बीच
कुछ लोग भटक चुके हैं

वह बनाना चाहती है
पूर्वजों के जमीन पर
एक नया रास्ता
जो थोप कर नहीं बनाई गई हो
जिसपर चलना बनावा और छलावा ना हो

जिस रास्तें का चेहरा मुस्कुरायें
जिसपर आदमियत चलती हो
नाक पर जीने वाली दुनिया
सिर्फ भेंद पैदा करना जानती हैं
जहां दिल रोता है अरमान बिलखते हैं

मेरे और तुम्हारे बीच की जमीन
जिसका रंग भी एक जैसा हैं ना
उन्हें तलाश है  आज भी
उन रास्तो की !!!

8 comments:

  1. जिस रास्तें का चेहरा मुस्कुरायें
    जिसपर आदमियत चलती हो
    नाक पर जीने वाली दुनिया
    सिर्फ भेंद पैदा करना जानती हैं
    जहां दिल रोता है अरमान बिलखते हैं

    सही बात कही है आपने इन पंक्तियों मे।

    सादर

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  2. मेरे और तुम्हारे बीच की जमीन
    जिसका रंग भी एक जैसा हैं ना
    उन्हें तलाश है आज भी
    उन रास्तो की !!!
    bahut khubsurat likha hai aapne...in bhavon ko...


    aadar sahit

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  3. आपके सब्द दिल को छु जाते है !बहुत ही अच्छी पोस्ट

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  4. कल 25/07/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  5. सुन्दर रचना। बधाई एवं शुभकामनाएं।

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  6. बहुत अच्छी लगी आपकी रचना ...........आभार

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  7. बेहद खूबसूरत रचना. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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  8. मेरे और तुम्हारे बीच की जमीन
    जिसका रंग भी एक जैसा हैं ना
    उन्हें तलाश है आज भी
    उन रास्तो की !!!

    बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति

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